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परशुराम की प्रतीक्षा
परशुराम की प्रतीक्षा
प्रकाशक :
लोकभारती प्रकाशन |
प्रकाशित वर्ष : 2005 |
पृष्ठ :80
मुखपृष्ठ :
सजिल्द
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पुस्तक क्रमांक : 1969
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रामधारी सिंह दिनकर की अठारह कविताओं का संग्रह...
परशुराम की प्रतीक्षा
खण्ड एक
गरदन पर किसका पाप वीर ! ढोते हो?
शोणित से तुम किसका कलंक धोते हो?
उनका, जिनमें कारुण्य असीम तरल था,
तारुण्य-ताप था नहीं, न रंच गरल था ;
सस्ती सुकीर्ति पा कर जो फूल गये थे,
निर्वीर्य कल्पनाओं में भूल गये थे ;
गीता में जो त्रिपिटक-निकाय पढ़ते हैं,
तलवार गला कर जो तकली गढ़ते हैं ;
शीतल करते हैं अनल प्रबुद्ध प्रजा का,
शेरों को सिखलाते हैं धर्म अजा का ;
सारी वसुन्धरा में गुरु-पद पाने को,
प्यासी धरती के लिए अमृत लाने को
जो सन्त लोग सीधे पाताल चले थे,
(अच्छे हैं अब पहले भी बहुत भले थे।)
हम उसी धर्म की लाश यहाँ ढोते हैं,
शोणित से सन्तों का कलंक धोते हैं।
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पुस्तक का नाम
परशुराम की प्रतीक्षा
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